VISION:

“Our vision is to establish and achieve excellence in decent work for sustainable social and economic development of the country.”

संगठन की दृष्टि:

देश की सामाजिक तथा आर्थिक उन्नति के लिए समस्त क्षेत्रों (संगठित, असंगठित क्षेत्र, शासकीय उपक्रमों और स्वयं-नियोजित क्षेत्र आदि) के कार्यों में उत्कृष्ठता प्राप्त करना।

NFITU’S AGENDA

National Front of Indian Trade Unions (NFITU) lead by Dr.Deepak Jaiswal, President and Chief General Secretary Shri Subhash Malgi have observed as under:

During past many years, the national as well as regional political parties have neglected the issues concerning the workers engaged in organised sector, unorganised sector, government undertakings and the self-employed etc.

The ILO Convention No.87 i.e. Right to Organise Even though ratified by the Government of India, the same is not honoured and also Article No.43A and 19.1.c &g of Constitution of India are not honoured.

It is necessary that political parties should specify their views and their commitment to issues concerning workers of the country. There have been many pieces of legislation with respect to labour in this country.

We are more specific on the issues raised below and expect the political parties to express their views and commitment to evolve machinery to finalize the issues of working class in a time bound manner and in case failure to maintain timeframe then it should attract punitive action against the concerned authority/s.

  • Right to form associations and the right to have collective bargaining.
  • labour participation in management.
  • Commitment and time bound program towards eradication of unemployment and rehabilitation of project affected citizens.
  • Commitment of implementation of contract labour regulation and abolition Act.
  • Commitment to implement principle of Equal Pay for Equal Work in all industries/Categories including to contract workers.
  • To provide adequate social security to all the workforce including farm labour.

एजेन्डा:-

केन्द्रीय श्रमिक संगठन (एनएफआईटीयू) के अध्यक्ष डॉ.दीपक जायसवाल तथा श्री सुभाष मलगी, मुख्य महासचिव के नेतृत्व में यह समीक्षा की गई कि:-

पिछले कई वर्षों के दौरान, राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय राजनैतिक दलों ने संगठित क्षेत्र, असंगठित क्षेत्र, शासकीय उपक्रमों और स्वयं-नियोजित आदि में कार्यरत श्रमिकों से संबंधित मुद्दों की उपेक्षा की है।

आईएलओ कन्वेंशन नं.8 यानी संगठित करने का अधिकार, भारत सरकार द्वारा अनुमोदित किए जाने के पश्चात् भी, इसे सम्मानित नहीं किया जाता है और भारत के संविधान के अनुच्छेद सं. 3 ए और 19.1 सी तथा जी को भी सम्मानित नहीं किया जाता है।

यह आवश्यक है कि राजनीतिक दलों को देश के श्रमिकों से संबंधित मुद्दों पर उनके विचार और प्रतिबद्धता निर्दिष्ट करनी चाहिए। इस देश में श्रम के संबंध में कानून के कई टुकडे हुए हैं।

हम नीचे उठाए गए विशिष्ट मुद्दों पर गम्भीर हैं तथा राजनैतिक दलों से उम्मीद करते हैं कि वे मजदूर वर्ग के मुद्दों को निश्चित समय-सीमा में अंतिम रूप देने के लिए मशीनरी विकसित करने हेतु उनके विचार और प्रतिबद्धता व्यक्त करें। समय-सीमा की विफलता के मामलों में संबंधित प्राधिकारी के विरूद्ध दंडनीय कार्यवाही आकर्षित की जाना चाहिए।

  • संगठित करने का अधिकार एवं सामूहिक सौदे का अधिकार
  • प्रबंधन कार्य में श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित हो
  • परियोजना प्रभावित नागरिकों की बेरोजगारी तथा पुनर्वास की समस्या का समयबद्ध निराकरण हेतु प्रतिबद्धता
  • अनुबंधित श्रमिकों के लिए Contract Labour Regulation and Abolition Act लागू करने हेतु प्रतिबद्धता
  • समान कार्य-समान वेतन की नीति समस्त उद्योगों/वर्गों (अनुबंधित श्रमिकों सहित) के लिए लागू करने हेतु प्रतिबद्धता
  • कृषी क्षेत्र से जुडे श्रमिकों सहित सम्पूर्ण श्रमिक वर्ग को समुचित सामाजिक सुरक्षा प्रदान किया जाने की प्रतिबद्धता